समान नागरिक संहिता (UCC) का कार्यान्वयन और संवैधानिक प्रावधान
चर्चा में क्यों?
राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 44 के तहत विभिन्न राज्यों द्वारा प्रारूप प्रस्तावित किए जाने के साथ समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights)
- 1भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का निर्देश देता है।
- 2यूसीसी का उद्देश्य प्रत्येक प्रमुख धार्मिक समुदाय के ग्रंथों और रीति-रिवाजों पर आधारित व्यक्तिगत कानूनों को सभी नागरिकों को नियंत्रित करने वाले कानूनों के एक सामान्य सेट से बदलना है।
- 3समर्थकों का तर्क है कि यूसीसी राष्ट्रीय एकीकरण, लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा और कानूनी प्रणाली को सरल बनाएगा।
- 4विरोधी अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण और आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक विविधता के संबंध में चिंता व्यक्त करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा दृष्टिकोण (Prelims)
- अनुच्छेद 44 संविधान के भाग IV (राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत) का हिस्सा है।
- गोवा वर्तमान में भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां समान नागरिक संहिता का संस्करण है, जो 1867 के पुर्तगाली नागरिक संहिता से विरासत में मिला है।
मुख्य परीक्षा दृष्टिकोण (Mains)
- धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और सामाजिक सुधारों को लागू करने की राज्य की शक्ति (अनुच्छेद 44) के बीच संघर्ष का विश्लेषण करें।
- शाह बानो (1985) और सरला मुद्गल (1995) जैसे मामलों का संदर्भ देते हुए यूसीसी बहस में न्यायपालिका की भूमिका का परीक्षण करें।
अभ्यास प्रश्न (Practice MCQ)
अपनी तैयारी की जांच के लिए सही विकल्प चुनें:
भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद समान नागरिक संहिता से संबंधित है?